
खबर खुलेआम
हीरालाल राठिया
लैलूंगा/रायगढ़ जहाँ अक्सर अभाव सपनों की राह रोक लेते हैं, वहीं रायगढ़ जिले के लैलूंगा क्षेत्र की एक आदिवासी बेटी ने अपने हौसले से हर बाधा को पीछे छोड़ दिया। बनेकेला गांव की रहने वाली हुलेश्वरी राठिया ने 510 अंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि मेहनत और लगन के आगे गरीबी भी हार मान जाती है। सरकारी स्कूल में पढ़ाई, सीमित संसाधन और आर्थिक तंगी ये सभी चुनौतियाँ उसके रास्ते में दीवार बनकर खड़ी थीं। लेकिन हुलेश्वरी ने हार मानने के बजाय हर कठिनाई को अपनी ताकत बनाया और लगातार मेहनत करते हुए मेरिट में स्थान हासिल कर लिया। स्वामी आत्मानंद स्कूल, झगरपुर में अध्ययनरत हुलेश्वरी ने बिना किसी महंगे कोचिंग या विशेष सुविधाओं के केवल अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर यह उपलब्धि हासिल की। दिन-रात की पढ़ाई, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण ने उसे इस मुकाम तक पहुंचाया।हुलेश्वरी के पिता पतिराम राम राठिया, जो एक साधारण परिवार से आते हैं, ने अपनी मेहनत और त्याग से बेटी के सपनों को संबल दिया। वहीं माता शिव कुमारी राठिया ने हर मुश्किल घड़ी में बेटी का हौसला बनाए रखा। परिवार का यही विश्वास आज उसकी सफलता की नींव बना। उसकी यह उपलब्धि न सिर्फ एक व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि उन सभी छात्रों के लिए एक संदेश है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।














