
खबर खुलेआम
कृषि भूमि पर फ्लाई-ऐश डंपिंग से किसानों में आक्रोश, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
रायगढ़/घरघोड़ा। विधानसभा में जब जनहित के मुद्दों पर चर्चा होती है, तो जनता को उम्मीद रहती है कि उनके अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। लेकिन रायगढ़ जिले के घरघोड़ा क्षेत्र की जमीनी हकीकत इन उम्मीदों पर सवाल खड़े कर रही है। यहां फ्लाई-ऐश (राखड़) के अवैध निपटान ने पर्यावरण और किसानों के भविष्य पर गहरा काला साया डाल दिया है। हाल ही में सदन में फ्लाई-ऐश निपटान को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई थी। प्रदेश के वित्त मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा था कि जिले में मॉडल एसओपी लागू है तथा वन एवं कृषि भूमि पर फ्लाई-ऐश डंपिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है। लेकिन घरघोड़ा में इन दावों की धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, सारडा एनर्जी द्वारा हजारों टन फ्लाई-ऐश को आवंटित कृषि भूमि पर धड़ल्ले से डंप किया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या घरघोड़ा की शासकीय और कृषि भूमि केवल औद्योगिक कचरे के निपटान का माध्यम बनकर रह गई है? प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों को दरकिनार कर राखड़ की डंपिंग जारी है। प्रभावित क्षेत्रों के आसपास के किसान वर्षों से खेती कर अपना जीवनयापन कर रहे हैं, लेकिन फ्लाई-ऐश की बारीक धूल जमीन की उर्वरता को नष्ट कर रही है और आने वाले समय में इन खेतों के बंजर होने का खतरा बढ़ता जा रहा है।

हैरानी की बात यह है कि दिन-रात सैकड़ों डंपर नियमों की अनदेखी करते हुए इस क्षेत्र से गुजर रहे हैं, फिर भी स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या यह महज लापरवाही है या फिर किसी प्रकार की साठगांठ? यदि वित्त मंत्री की घोषणा के बाद भी स्थिति जस की तस है, तो यह संदेह और गहरा हो जाता है कि क्या उद्योग शासन-प्रशासन से ऊपर हैं। यदि जल्द ही इस “राखड़ राज” पर लगाम नहीं कसी गई, तो घरघोड़ा का जलस्तर और भूमि दोनों ही प्रदूषित हो सकते हैं। किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा और क्षेत्र में गंभीर बीमारियों के फैलने की आशंका भी बढ़ सकती है। बहरहाल अब देखना यह है कि प्रशासन अपनी कुंभकर्णी नींद से कब जागता है और इस काले खेल पर अंकुश लगाता है, या फिर घरघोड़ा की धरती यूं ही जहरीली राख के बोझ तले दबती रहेगी।
अपडेट के लिए बने रहिये
सरडा एनर्जी is boss?
क्या टॉवर लगी जमीन फ्लाइ एस का भण्डारण उचित ?
शासन द्वारा आबंटित जमीन पर किस तरह दी गई अनुमति उचित ?
धान उत्पादन वाली जमीन पर भंडारण होना उचित?
समतल जमीन को खोद कर भंडारण कि अनुमति उचित है ?
खेती होती जमीन से लग के राख का भंडारण उचित?
पंचायत कर्मी से लेकर पटवारी कि भूमिका ?
युवा नेता के शिकायत के बाद भी लीपापोती का प्रयास?
विभाग को जमीन निजी है या आबाटित या स्पस्ट नहीं हो या रहा है या कार्यवाई में हाँथ पाँव फूल रहें है कारण ?
ऐसे बहुत से सवालों के जवाब मिलते है












