
डेस्क खबर खुलेआम
गणेश भोय जिला ब्यूरो जशपुर
पत्थलगांव/तमता। मुख्यमंत्री के गृह जिले जशपुर में शासकीय योजनाओं में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। पत्थलगांव विकासखंड के तमता शासकीय बालक छात्रावास के अधीक्षक बुधनाथ भगत पर छात्रावास में रहने वाले बच्चों के लिए मिलने वाले राशन और जरूरी सामान में गड़बड़ी करने के साथ ही नौकरी के नाम पर कथित रूप से लाखों रुपये की वसूली किए जाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर शिकायतें सामने आने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि छात्रावास के विद्यार्थियों के लिए शासन से मच्छरदानी, कंबल, तकिया, तेल, साबुन और रसोई के बर्तनों सहित विभिन्न आवश्यक सामग्रियों के लिए बजट उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन कथित तौर पर इन सामग्रियों की खरीदी और वितरण में अनियमितता बरती गई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कागजों में खर्च दिखाए जाने के बावजूद छात्रावास में बच्चों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं अधीक्षक पर नौकरी लगवाने का झांसा देकर बेरोजगारों से कथित तौर पर लाखों रुपये की वसूली किए जाने के भी आरोप लगाए गए हैं। वहीं बालक एवं कन्या छात्रावास में कार्यरत बताए जा रहे दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों—स्टीफन खलखो और हेमू अजगले—की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि उन्हें बिना वैध सरकारी आदेश या पंचायत प्रस्ताव के काम पर रखा गया। मामला सामने आने के बाद मंडल संयोजक द्वारा जांच किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जांच के दौरान उनके बयान दर्ज नहीं किए गए और न ही छात्रावास में रहने वाले बच्चों से पूरे मामले की जानकारी ली गई। ऐसे में जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर छात्रावास में कथित अनियमितताओं की वास्तविकता क्या है? नौकरी के नाम पर वसूली के आरोपों में कितनी सच्चाई है? कर्मचारियों की पदस्थापना किस आदेश के तहत हुई? और जांच में शिकायतकर्ताओं व विद्यार्थियों के बयान क्यों नहीं लिए गए—इन सवालों के जवाब अब जांच से ही सामने आ सकते हैं।ग्रामीणों और अभिभावकों ने मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों और अधीक्षक का पक्ष सामने आने के बाद मामले की पूरी तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।










