
डेस्क खबर खुलेआम
गणेश भोय जिला ब्यूरो जशपुर
पत्थलगांव।कहते हैं कि जमीन इंसान की सबसे बड़ी पूंजी होती है, लेकिन जब उसी पूंजी पर कथित तौर पर फर्जीवाड़े की परत चढ़ जाए, तो पीड़ित परिवार के सामने जिंदगी का संकट खड़ा हो जाता है। जशपुर जिले के ग्राम पंचायत बालाझार में सामने आए एक भूमि विवाद ने प्रशासनिक व्यवस्था और रजिस्ट्री प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्होंने मात्र एक एकड़ भूमि बेचने की सहमति दी थी, लेकिन जब दस्तावेज सामने आए तो रजिस्ट्री में 1.77 एकड़ भूमि दर्ज पाई गई। यानी करीब 0.77 एकड़ अतिरिक्त भूमि कथित रूप से दस्तावेजों में शामिल कर ली गई। परिवार का कहना है कि उनकी अशिक्षा का लाभ उठाकर यह पूरा खेल रचा गया। ग्रामीणों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में एक एकड़ की जगह 1.77 एकड़ भूमि का हस्तांतरण हुआ है, तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि रजिस्ट्री प्रक्रिया के दौरान संबंधित राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका क्या रही और दस्तावेजों की जांच कैसे हुई। मामले को और गंभीर बनाने वाले आरोप भी सामने आए हैं। पीड़ित परिवार का दावा है कि उन्हें लगातार दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। परिवार ने नाबालिग बेटी को धमकाने, घर तोड़ने के लिए जेसीबी लगाने की कोशिश तथा दो लाख रुपये का चेक बाउंस होने जैसे आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मामला न्यायालय में विचाराधीन है तो किसी भी प्रकार की कब्जे या तोड़फोड़ की कार्रवाई कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। वहीं चेक बाउंस की शिकायत भी कथित आर्थिक धोखाधड़ी की ओर इशारा करती है।हालांकि पुलिस द्वारा मामले में हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को थाने बुलाकर समझाइश दी गई है और न्यायालयीन प्रक्रिया का पालन करने की सलाह दी गई है, लेकिन पीड़ित परिवार का कहना है कि केवल सलाह से न्याय नहीं मिलेगा। उन्हें निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की अपेक्षा है।इस पूरे घटनाक्रम ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया में कहीं गड़बड़ी हुई? क्या अशिक्षा का फायदा उठाकर दस्तावेजों में हेरफेर किया गया? और यदि ऐसा हुआ है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी?अब निगाहें प्रशासन और सरकार पर टिकी हैं। ग्रामीणों की मांग है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए, ताकि आम लोगों का भरोसा कानून और प्रशासन पर कायम रह सके।फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—एक एकड़ का सौदा आखिर पौने दो एकड़ तक कैसे पहुंच गया?













