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जलकुम्भी के आड़ मे लाखों का खेल …नगर पंचायत के दावों की खुली पोल .. संरक्षण मे सफाई के नाम पर लीपापोती

By Khabar Khule Aam Desk

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खबर खुलेआम

घरघोड़ा। नगर पंचायत घरघोड़ा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वार्ड क्रमांक 10-12 स्थित बगमुड़ा और छोटेमुड़ा तालाब में जलकुंभी हटाने को लेकर किए गए दावों की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। पखवाड़े भर पहले नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों ने तालाबों से जलकुंभी हटाने का दावा किया था, लेकिन अब सामने आ रही तस्वीरें और स्थानीय लोगों के आरोप इन दावों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि संबंधित ठेकेदार द्वारा एक तालाब से निकाली गई जलकुंभी को पूरी तरह नष्ट करने या निर्धारित स्थल पर निस्तारित करने के बजाय दूसरे तालाब और उसके आसपास डंप किया जा रहा है। नतीजा यह है कि समस्या का समाधान होने के बजाय जलकुंभी एक तालाब से दूसरे तालाब तक पहुंच रही है। लोगों का कहना है कि सफाई अभियान महज औपचारिकता बनकर रह गया है और 19 लाख के ठेके से लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। गौरतलब है कि इस मुद्दे को लेकर पूर्व में समाचार प्रकाशित होने के बाद नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) ने कार्रवाई का आश्वासन देते हुए जलकुंभी हटवाने का दावा किया था। लेकिन पखवाड़े भर बाद भी हालात में कोई ठोस सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। आरोप है कि अवकाश के दिनों का लाभ उठाकर ठेकेदार फिर वही काम दोहरा रहा है, जिससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर उसे किसका संरक्षण प्राप्त है।

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तालाब किनारे बड़ी मात्रा में डंप की गई जलकुंभी अब सड़ने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे उठने वाली दुर्गंध आसपास के मोहल्लों में फैल रही है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। नागरिकों ने चेतावनी दी है कि समय रहते उचित निस्तारण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार जलकुंभी तेजी से फैलने वाला जलीय खरपतवार है, जो जलाशयों में ऑक्सीजन की मात्रा कम कर देता है। इससे जलजीवों के साथ-साथ पूरे जलस्रोत का पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित होता है। ऐसे में इसे एक स्थान से हटाकर दूसरे स्थान पर डालना समस्या को समाप्त करने के बजाय और बढ़ाने जैसा है। बगमुड़ा और छोटेमुड़ा तालाब के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के लिए लाखों रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं, लेकिन छोटेमुड़ा तालाब का कार्य आज भी अधूरा पड़ा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि राजनीतिक खींचतान और प्रशासनिक उदासीनता के कारण तालाबों का संरक्षण प्रभावित हो रहा है और इसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। क्षेत्र के प्रबुद्धजन और वार्डवासी अब इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जलकुंभी के वैज्ञानिक और स्थायी निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार की भूमिका की जांच हो। जानकारी के अनुसार प्रतिनिधिमंडल सोमवार को उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपकर कार्रवाई की मांग करेगा।अब बड़ा सवाल यह है कि जलकुंभी हटाने के नाम पर खर्च हो रही राशि का वास्तविक लाभ आखिर जनता को कब मिलेगा, और ठेकेदार की मनमानी पर लगाम कौन लगाएगा?

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Khabar Khule Aam Desk

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