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बिजली, कोयला, स्टील, पेट्रोलियम और बंदरगाहों की सुरक्षा के लिए गठित होंगे विशेषज्ञ सेक्टर; रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा होगी और मजबूत
रायगढ़ , 17 अक्टूबर 2026। देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक एवं रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और मजबूत बनाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) अपने प्रशासनिक और परिचालन ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव करने जा रहा है। गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद सीआईएसएफ का नया ढांचा 1 नवंबर 2026 से देशभर में लागू होगा। इस पुनर्गठन के तहत अब सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल भौगोलिक क्षेत्रों के आधार पर नहीं, बल्कि प्रतिष्ठानों की प्रकृति और उनकी विशिष्ट सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप तय की जाएगी। इससे सुरक्षा व्यवस्था में विशेषज्ञता बढ़ेगी, निगरानी मजबूत होगी और विभिन्न प्रतिष्ठानों के प्रबंधन के साथ समन्वय बेहतर होगा।
सीआईएसएफ वर्तमान में हवाई अड्डों, बंदरगाहों, परमाणु एवं अंतरिक्ष केंद्रों, बिजली संयंत्रों, स्टील प्लांटों, कोयला खदानों, पेट्रोलियम रिफाइनरियों, सरकारी भवनों, संग्रहालयों, ऐतिहासिक स्मारकों और मेट्रो नेटवर्क सहित अनेक महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहा है। इन सभी प्रतिष्ठानों की कार्यप्रणाली, बुनियादी ढांचे और सुरक्षा चुनौतियों में अंतर होने के कारण इनके लिए अलग-अलग विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए सीआईएसएफ अब अपनी कमान व्यवस्था को क्षेत्रीय आधार से आगे बढ़ाकर कार्यात्मक यानी ‘डोमेन आधारित’ स्वरूप दे रहा है। इससे समान प्रकृति के प्रतिष्ठानों की सुरक्षा एक विशेषज्ञ कमान के अधीन होगी। परिणामस्वरूप जवानों के प्रशिक्षण, सुरक्षा मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी), परिचालन निगरानी और आपात स्थितियों से निपटने की क्षमता में सुधार होने की उम्मीद है।

पिछले लगभग 25 वर्षों में एविएशन, परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) और अंतरिक्ष विभाग (डीओएस) जैसे क्षेत्रों में कार्यात्मक सुरक्षा व्यवस्था के अनुभव से मिले लाभों को देखते हुए अब शेष क्षेत्रीय सेक्टरों का भी पुनर्गठन किया गया है।
पुनर्गठन के तहत मौजूदा सेक्टरों को विभिन्न कार्यक्षेत्रों के अनुसार नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सेक्टर को पुनर्गठित कर सरकारी भवन, संग्रहालय, स्मारक एवं एमआरटीएस सेक्टर बनाया गया है, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में होगा।इसी तरह नॉर्थ सेक्टर को पावर-1 सेक्टर और नॉर्थ ईस्टर्न सेक्टर-1 को पावर-2 सेक्टर में बदला गया है। ईस्टर्न सेक्टर, रांची को कोयला सेक्टर तथा सेंट्रल सेक्टर, भिलाई को समर्पित स्टील सेक्टर का स्वरूप दिया गया है। नॉर्थ ईस्टर्न सेक्टर, गुवाहाटी को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सेक्टर के रूप में पुनर्गठित किया गया है।समुद्री व्यापार और बंदरगाहों की सुरक्षा को अधिक प्रभावी बनाने के लिए वेस्टर्न सेक्टर, मुंबई को वेस्ट कोस्ट पोर्ट सेक्टर तथा साउथ सेक्टर, चेन्नई को ईस्ट कोस्ट पोर्ट सेक्टर में परिवर्तित किया गया है। वहीं, डीएई एवं डीओएस सेक्टर, बेंगलुरु और एयरपोर्ट सेक्टरों की मौजूदा कार्यात्मक व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।

सीआईएसएफ की जिम्मेदारियां अब पारंपरिक औद्योगिक सुरक्षा से आगे बढ़कर कई नए और संवेदनशील क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं। बंदरगाहों की सुरक्षा के लिए बल को अंतरराष्ट्रीय जहाज एवं बंदरगाह सुविधा सुरक्षा संहिता (आईएसपीएस कोड) के तहत मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन (आरएसओ) के रूप में नामित किया गया है। नए ढांचे से बंदरगाह सुरक्षा में विशेषज्ञता और जवाबदेही को मजबूत करने में मदद मिलेगी।इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर में अति-संवेदनशील जेलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सीआईएसएफ को सौंपी गई है। महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए बल को हवाई सुरक्षा की नोडल एजेंसी भी बनाया गया है। इन नई जिम्मेदारियों के प्रभावी निर्वहन के लिए विशेष प्रशिक्षण, स्पष्ट कमान व्यवस्था और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक है।

बदलते सुरक्षा परिदृश्य में तकनीक की बढ़ती भूमिका को देखते हुए सीआईएसएफ साइबर सुरक्षा, ड्रोन और एंटी-ड्रोन क्षमताओं को भी मजबूत कर रहा है। इसके लिए प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ सहयोग किया जा रहा है, ताकि महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को साइबर हमलों, संदिग्ध ड्रोन गतिविधियों और उभरते तकनीकी खतरों से सुरक्षित रखा जा सके।
सीआईएसएफ का यह पुनर्गठन देश की औद्योगिक, आर्थिक और रणनीतिक संपत्तियों की सुरक्षा को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। सेक्टर-विशेष कमान व्यवस्था से सुरक्षा मानकों में एकरूपता, बेहतर परिचालन समन्वय और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलेगी। नया ढांचा बल को भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए अधिक सक्षम और तैयार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इससे देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा मजबूत करने और भारत की आर्थिक प्रगति को सुरक्षित आधार प्रदान करने में सीआईएसएफ की भूमिका और प्रभावी होने की उम्मीद है।





