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उच्च न्यायालय के निर्णय में देरी व विभाग के अधिकारियों की मनमानी से छात्रावास अधीक्षकों में असमंजस

By Khabar Khule Aam Desk

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डेस्क खबर खुलेआम

विगत 10 वर्षों से निरंतर प्रदेश की दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में अपने घर-परिवार से दूर, छात्रों की सेवा में समर्पित छात्रावास अधीक्षक विभाग के अधिकारियों की मनमानी एवं उच्च न्यायालय के निर्णय में देरी के कारण असमंजस की स्थिति में हैं और मानसिक तनाव से गुजरने को मजबूर हैं। ज्ञातव्य है कि पूरे प्रदेश में छात्रावास अधीक्षकों का काउंसलिंग के माध्यम से पदस्थापना होना है। लेकिन आदिवासी विकास विभाग के मनमानी के कारण राज्य कैडर का पद को राज्य स्तर पर काउंसलिंग करने के बजाय जिला स्तर पर काऊंसलिंग कर पदस्थापना दिया जा रहा है

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जिसमें समस्त नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। इस संदर्भ में अधीक्षकों द्वारा उच्च न्यायालय में अनेक वाद दायर किए गए हैं, जिसकी सुनवाई हो चुकी है परंतु अंतिम निर्णय लंबित है। इधर उच्च न्यायालय में निर्णय लंबित होने के बाद भी आदिवासी विकास विभाग द्वारा छात्रावास अधीक्षकों का पदस्थापना आदेश जारी कर दिया गया है और 7 दिनों के भीतर नए पदस्थापना स्थान पर ज्वाइन करने का आदेश दिया गया है। निर्णय में देरी से अधीक्षकों को प्राकृतिक न्याय से वंचित होना पड़ रहा है।

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ध्यान देने वाली बात यह है कि पदस्थापना आदेश 5 अगस्त दिन मंगलवार को जारी हुआ है लेकिन उसमें दिनांक 1 अगस्त अंकित है। मतलब अधीक्षकों के पास ज्वाइनिंग के लिए 7 दिवस नहीं, बल्कि केवल 2 दिन बच रहे हैं। इसी प्रकार एक आदेश 14 अगस्त को जारी किया गया जिसमें दिनाँक 12 अगस्त अंकित है। अवकाश होने के कारण इसमें भी केवल दो दिन का समय बच रहा है।

विदित हो कि आवेदनों के माध्यम से जिला स्तर एवं राज्य स्तर पर अधीक्षकों की समस्याओं के बारे में अवगत कराया गया है परंतु विभाग के अधिकारियों द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए अधीक्षकों के पदस्थापना का आदेश निकाला जा रहा है। विसंगतियों को निम्न आधार पर समझा जा सकता है । राज्य कैडर का पद होने के बावजूद जिला स्तर पर काउंसलिंग करके अधीक्षकों का पदस्थापना आदेश जारी कर दिया गया है।प्रतिनियुक्ति और अटैचमेंट के नाम पर छात्रावासों में कार्यरत प्रभारी अधीक्षक, जो कि मूलतः शिक्षक संवर्ग के हैं, उन छात्रावासों को पदस्थापना हेतु रिक्त नहीं माना जा रहा है।2015 और 2016 में अलग-अलग वर्षों में नियुक्त तथा अलग-अलग वर्षों में पदोन्नत छात्रावास अधीक्षकों की वरिष्ठता क्रम की अवहेलना करके सीनियर और जूनियर अधीक्षकों का एकसाथ पदस्थापना किया जा रहा है, जो कि सीनियर अधीक्षकों के साथ अन्याय है। माननीय उच्च-न्यायालय का अंतिम निर्णय आने से पहले पदस्थापना आदेश जारी होने पर उन्हें नए स्थान पर समय सीमा के अंदर ज्वाइन करना पड़ेगा, जिससे माननीय उच्च न्यायालय द्वारा काउंसलिंग की प्रक्रिया दोषपूर्ण पाए जाने और उसे अमान्य करने की स्थिति में नए स्थान पर ज्वाइन कर चुके छात्रावास अधीक्षकों को बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। समस्त छात्रावास अधीक्षक अब माननीय उच्च न्यायालय से ही शीघ्र न्याय मिलने की आस लगाए हुए हैं।

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Khabar Khule Aam Desk

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