
डेस्क खबर खुलेआम
रायगढ़। जिले में ऑनलाइन आईपीएल सट्टे के खिलाफ चल रहे पुलिस अभियान के बीच लंबे समय से फरार बताए जा रहे करण अग्रवाल उर्फ करण चौधरी ने आखिरकार न्यायालय में सरेंडर कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस की लगातार घेराबंदी और बढ़ते दबाव के चलते उसने कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने कि जानकारी सामने आ रही है । जिसके बाद पूरे शहर में मामले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। आईपीएल सट्टे पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देश पर जिलेभर में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। साइबर सेल और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में कई सटोरियों पर लगातार कार्रवाई हो रही है। इसी कड़ी में घरघोड़ा थाना में दर्ज मामले में करण चौधरी का नाम सामने आने के बाद पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी हुई थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, शहर के कुछ शातिर लोग सामाजिक और राजनीतिक छवि की आड़ लेकर लंबे समय से सट्टा सिंडिकेट संचालित कर रहे हैं। धार्मिक आयोजनों और समाजसेवा के माध्यम से खुद को प्रतिष्ठित दिखाने वाले ये लोग क्रिकेट सीजन शुरू होते ही प्रदेश से बाहर बैठकर ऑनलाइन नेटवर्क सक्रिय कर देते हैं। सट्टे के लेन-देन, हिसाब-किताब और रकम की कटिंग के लिए अलग-अलग लोगों की नियुक्ति किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। करण चौधरी का नाम पहले भी कई विवादों और आपराधिक मामलों में सामने आ चुका है। उस पर सट्टा कारोबारियों को संरक्षण देने के साथ-साथ एक नाबालिग युवक के अपहरण और मारपीट जैसे गंभीर आरोप लग चुके हैं। गिरफ्तारी की आशंका के बीच उसका एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था, जिसमें उसने खुद को बेगुनाह बताते हुए दावा किया था कि यदि तीन वर्षों के भीतर उसके खिलाफ सट्टे का मामला साबित हो जाए तो वह खुद आत्मसमर्पण कर देगा और जमानत की अर्जी भी नहीं लगाएगा। चर्चा यह भी रही कि करण चौधरी सोशल मीडिया पर कई बड़े नेताओं और अधिकारियों के साथ तस्वीरें साझा कर स्वयं को समाजसेवी के रूप में प्रस्तुत करता रहा है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि बिना साक्ष्य किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती।फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। वहीं सूत्रों के मुताबिक, लगातार बढ़ते दबाव और कार्रवाई के बीच करण चौधरी के कोर्ट में सरेंडर करने की जानकारी सामने आई है।













