
डेस्क खबर खुलेआम
पत्थलगांव के पाकरगांव में लोहे के खंभे (पोल) की शिफ्टिंग के दौरान बड़ा हादसा हो गया। सूत्रों के मुताबिक काम में 10 से 12 मजदूर लगे थे। शिफ्टिंग के दौरान अचानक खंभे में करंट दौड़ पड़ा, जिससे वहां काम कर रहे मजदूरों में अफरातफरी मच गई। इस हादसे में दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। जानकारी के मुताबिक पाकरगांव में प्राइवेट जमीन पर लोहे के बिजली खंभे की शिफ्टिंग का कार्य चल रहा था, जिसमें 10 से 12 मजदूर लगे हुए थे। काम के दौरान अचानक खंभे में करंट दौड़ पड़ा। करंट की चपेट में आकर मजदूरों में भगदड़ मच गई। दो मजदूरों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। दो गंभीर घायलों को पत्थलगांव सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। वहीं अन्य मजदूरों को भी चोटें आई हैं।विभाग का बयान: पाकरगांव में कोई परमिट जारी नहीं हुआ थामामले में विद्युत विभाग का आधिकारिक बयान सामने आया है। पत्थलगांव के कार्यपालन यंत्री सत्येंद्र मरकाम ने बताया कि पाकरगांव, जहां यह खंभा शिफ्टिंग का कार्य चल रहा था, वहां विभाग के द्वारा किसी प्रकार का परमिट नहीं लिया गया था।कार्यपालन यंत्री के इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि पाकरगांव में हो रहा काम पूरी तरह अवैध था। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना विभागीय परमिट के यह काम किसके आदेश पर और किसकी शह पर कराया जा रहा था?अधीक्षण अभियंता का बड़ा फैसला: संबंधित व्यक्ति पर FIR के निर्देशमामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। कुनकुरी के अधीक्षण अभियंता सत्य प्रकाश कुमार ने बताया कि विभाग ने संबंधित व्यक्ति के ऊपर FIR दर्ज कराने के निर्देश दे दिए हैं।अधीक्षण अभियंता के इस बयान के बाद अब अवैध काम कराने वालों पर कानूनी शिकंजा कसने की उम्मीद जगी है। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ FIR ही काफी नहीं है, दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।मामले में पुलिस का पक्ष भी सामने आया है। पत्थलगांव एसडीओपी डॉक्टर धुर्वेश जायसवाल ने बताया कि पत्थलगांव थाना क्षेत्रांतर्गत पाकरगांव में प्राइवेट जमीन पर खंभा शिफ्टिंग के काम में लगे दो मजदूर ठामन ध्रुव एवं अलेक भगत की मौके पर मौत हो गई। सूचना प्राप्त होने पर पत्थलगांव थाना में मर्ग कायम कर विवेचना जारी है।एसडीएम ने अस्पताल पहुंचकर घायलों से की मुलाकातहादसे की सूचना मिलते ही पत्थलगांव एसडीएम क्षितिज गुरभेले पत्थलगांव सिविल अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घायलों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। एसडीएम ने अस्पताल के डॉक्टरों को घायलों का बेहतर इलाज करने के निर्देश दिए। प्रशासन की इस तत्परता से पीड़ित परिवारों को कुछ राहत मिली है।जिम्मेदार कौन — विभाग या ठेकेदार?कार्यपालन यंत्री के बयान के बाद ठेकेदार की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। क्या ठेकेदार ने विभाग को अंधेरे में रखकर अवैध रूप से काम कराया? या विभाग के ही किसी अधिकारी-कर्मचारी की मिलीभगत से यह काम हो रहा था? जानकारों का कहना है कि इतने बड़े काम को विभाग की नजर से छिपाकर करना आसान नहीं है।बड़े सवालजब विभाग ने पाकरगांव का कोई परमिट जारी नहीं किया, तो काम किसने कराया?FIR के निर्देश के बाद संबंधित व्यक्ति पर मामला कब दर्ज होगा?क्या ठेकेदार ने फर्जी परमिट के सहारे काम शुरू किया?खंभे में करंट कैसे दौड़ा — क्या लाइन बंद किए बिना काम कराया जा रहा था?10-12 मजदूरों को सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षण दिया गया था या नहीं?गंभीर घायलों के इलाज का खर्च कौन उठाएगा?क्या विभाग अपने ही अधिकारियों की भूमिका की जांच करेगा?ग्रामीणों में आक्रोशहादसे के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि बिना परमिट के काम कराना सीधी लापरवाही है, जिसकी कीमत दो बेगुनाहों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। ग्रामीणों ने कहा कि दो परिवारों के चिराग बुझ गए और दो लोग अस्पताल में जिंदगी-मौत से जूझ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अब भी एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं।मुआवजे और जांच की मांगग्रामीणों और पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा है कि चाहे ठेकेदार हो या विभाग का अधिकारी, दोषी जो भी हो उस पर हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए। साथ ही मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा, गंभीर घायलों के इलाज की पूरी व्यवस्था और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग भी की गई है।





