
डेस्क खबर खुलेआम
सक्ति / 14 अप्रैल को प्रदेश में दिल दहला देने वाली घटना हुई है जिसमे सक्ति जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता थर्मल पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट ने पूरे क्षेत्र को शोक और आक्रोश में डुबो दिया है। यूनिट-1 में तकनीकी खराबी और स्टीम पाइप फटने से 34 श्रमिक इसकी चपेट में आ गए, जिनमें से अब तक 17 श्रमिकों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।
कलेक्टर श्री टोपनो ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार घायलों को सर्वोत्तम उपचार उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। मृतकों की पहचान कर उनके परिजनों से संपर्क स्थापित किया जा रहा है। पोस्टमार्टम उपरांत पार्थिव देह को उनके गृहग्राम तक एम्बुलेंस के माध्यम से भेजने और तात्कालिक सहायता राशि उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।हादसे में घायल अथवा प्रभावित श्रमिकों को पूर्ण रूप से स्वस्थ होने तक बिना उपस्थिति के वेतन देने पर भी सहमति बनाई गई है। कलेक्टर ने बताया कि मुआवजा राशि को लेकर देर रात तक चर्चा कर सहमति स्थापित की गई है। घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं तथा जांच टीम जल्द ही घटनास्थल का निरीक्षण करेगी। रेस्क्यू कार्य में एसडीआरएफ की टीम भी सक्रिय है।मुख्यमंत्री द्वारा मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि की घोषणा की गई है। इसी प्रकार, प्रधानमंत्री द्वारा मृतकों के परिजनों हेतु 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की अनुग्रह सहायता स्वीकृत की गई है।पुलिस अधीक्षक श्री प्रफुल्ल ठाकुर ने जानकारी दी कि इस हादसे में कुल 36 श्रमिक प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 17 की मृत्यु हो चुकी है तथा 19 घायल हैं, जिनका उपचार जारी है।कंपनी प्रबंधन ने कहा है कि वे प्रभावित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। दिवंगत श्रमिकों के परिजनों को 35 लाख रुपये की आर्थिक सहायता एवं रोजगार सहयोग, तथा घायलों को 15 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। घायलों को पूर्ण स्वस्थ होने तक वेतन जारी रहेगा और परामर्श (काउंसलिंग) की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
घटना के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्लांट के प्रभावित हिस्से को पूरी तरह सील कर दिया है। रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है और मलबे में किसी के फंसे होने की आशंका को खत्म करने के लिए सघन तलाशी ली जा रही है। मौके पर प्रशासनिक अमला और भारी पुलिस बल तैनात है, जबकि प्लांट के भीतर बाहरी लोगों और मीडिया के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। हादसे में झुलसे श्रमिकों को रायगढ़ के निजी अस्पतालों फोर्टिस जिंदल, अपेक्स और बालाजी मेट्रो में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की टीमें लगातार उपचार में जुटी हैं। कई घायलों की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। परिजनों के आक्रोश को देखते हुए अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। एसडीएम डभरा को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है, जिन्हें 30 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि घटना के समय कौन-कौन श्रमिक ड्यूटी पर थे, क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया, औद्योगिक सुरक्षा विभाग का अंतिम निरीक्षण कब हुआ और इस हादसे के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है। प्रारंभिक तौर पर प्लांट प्रबंधन और ठेका कंपनी की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं that जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या सहित कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हादसे में मृतकों के नाम – रितेश कुमार (सोनबर्शा, भागलपुर, बिहार) अमृत लाल पटेल (मंझापारा, डभरा, सक्ती, छत्तीसगढ़) थंडा राम लहरे (मालखरौदा, सक्ती, छत्तीसगढ़) तरुण कुमार ओझा (सिंदरी, धनबाद, झारखंड)आकिब खान (दरभंगा, बिहार) सुसांत जना (पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल) अब्दुल करीम (झारखंड) उधव सिंह यादव (रायगढ़, छत्तीसगढ़) शेख सैफुद्दीन (हल्दिया, पश्चिम बंगाल)पप्पू कुमार (सोनभद्र, उत्तर प्रदेश) अशोक परहिया (पलामू, झारखंड)मनस गिरी (पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल) बृजेश कुमार (सोनभद्र, उत्तर प्रदेश)रामेश्वर महिलांगे (जांजगीर–चांपा, छत्तीसगढ़) कार्तिक महतो (पुरुलिया, पश्चिम बंगाल) नदीम अंसारी (सक्ती, छत्तीसगढ़) शिबनाथ मुर्मू (पुरुलिया, पश्चिम बंगाल)














