
डेस्क खबर खुलेआम
सुकदेव आजाद जांजगीर चाम्पा
बिलाईगढ़ नगर पंचायत में इन दिनों हालात कुछ ऐसे हैं कि हर गली में एक ही चर्चा है—लोकतंत्र चल रहा है या फिर लूटतंत्र हावी है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) पर लगे गंभीर आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं और जनाक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। चुनाव के बाद से अब तक एक भी परिषद बैठक नहीं हुई। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को दरकिनार करने की सुनियोजित कोशिश है। वहीं CMO की अनियमित उपस्थिति ने भी संदेह को और गहरा कर दिया है। होली से पहले ₹16 लाख की राशि की निकासी अब पूरे विवाद का केंद्र बन गई है। आरोप है कि बिना अध्यक्ष की अनुमति, बिना प्रस्ताव और बिना बैठक के यह रकम निकाल ली गई। सवाल उठ रहे हैं पैसा गया कहां ? किसके आदेश से निकला ? और हिसाब कौन देगा ?
नगर में अधूरे निर्माण, सड़कों पर फैली सामग्री और बढ़ते हादसों का खतरा विकास कार्यों की पोल खोल रहा है। आरोप है कि कई काम कागजों में पूरे दिखाकर राशि का उपयोग संदिग्ध तरीके से किया गया।आवाज उठी तो आरोप दमन कानिर्दलीय अध्यक्ष और पार्षदों का कहना है कि विरोध करने पर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। यहां तक कि SC/ST एक्ट जैसे संवेदनशील कानून के दुरुपयोग का आरोप भी लगाया गया है। यदि यह सच है, तो मामला सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला माना जा रहा है। मामला नगरीय प्रशासन विभाग, मंत्री और राज्यपाल तक पहुंच चुका है। हाईकोर्ट में याचिका भी दायर है, लेकिन स्थानीय स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। दबाव की राजनीति या संयोग? प्रभावित पक्ष का दावा है कि यह पूरा घटनाक्रम एक रणनीति का हिस्सा है—निर्दलीय नेतृत्व को कमजोर कर सत्ता पर एक तरफा कब्जा जमाने की कोशिश।जनप्रतिनिधियों की मांगें तेज CMO की जांच और निलंबन,₹16 लाख का सार्वजनिक ऑडिट,अधूरे कार्यों की समीक्षा,पार्षदों को न्यायिक राहत,और नियमित परिषद बैठकों की बहाली—ये मांगें अब आंदोलन का रूप लेती दिख रही हैं। बिलाईगढ़ की जनता अब चुप नहीं है। सवाल गूंज रहा है—“सत्ता सेवा के लिए है या दमन के लिए?”और संदेश भी साफ है—अगर हालात नहीं बदले, तो अगला फैसला जनता अपने वोट से देगी।














