
डेस्क खबर खुलेआम
रायपुर। छत्तीसगढ़ वन विभाग में प्रतिनियुक्ति के माध्यम से वन विकास निगम के अधिकारी को सामान्य वन क्षेत्र में परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) के पद पर पदस्थ किए जाने का मामला तूल पकड़ने लगा है। छत्तीसगढ़ फॉरेस्ट रेंजर एसोसिएशन, रायपुर ने इस पदस्थापना पर आपत्ति जताते हुए वन मंत्री और वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव को विरोध पत्र सौंपा है। एसोसिएशन का कहना है कि विभागीय व्यवस्था में पहली बार अन्य विभाग से प्रतिनियुक्ति पर रेंजर के पद पर पदस्थापना की गई है, जिसका संगठन विरोध कर रहा है।एसोसिएशन द्वारा 27 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड से प्रतिनियुक्ति पर आए निशांत सिंह ठाकुर को सामान्य वनमंडल बस्तर के करपावंड परिक्षेत्र में परिक्षेत्र अधिकारी के पद पर पदस्थ किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। यह पदस्थापना शासन के 26 अक्टूबर 2026 के आदेश के तहत की गई है।एसोसिएशन ने अपने पत्र में कहा है कि वन विभाग में सामान्यतः नियमित वन क्षेत्रपालों को प्रतिनियुक्ति पर वन विकास निगम भेजा जाता है, लेकिन इस बार इसके विपरीत वन विकास निगम से अधिकारी को वापस वन विभाग में रेंजर के पद पर पदस्थ किया गया है। संगठन ने इसे विभागीय परंपरा से अलग निर्णय बताया है।पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2023 में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के माध्यम से 177 सामान्य वन क्षेत्रपालों की सीधी भर्ती की गई थी। संगठन के अनुसार, वर्ष 2026 तक पदोन्नति से कई वन क्षेत्रपालों की नियुक्ति भी हुई है। ऐसे में सामान्य वन परिक्षेत्रों में पदस्थापना के लिए विभाग में उपलब्ध अधिकारियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।एसोसिएशन ने अपने विरोध पत्र में सामान्य वन परिक्षेत्र अधिकारी के पद को राजपत्रित अधिकारी का पद बताते हुए गैर-राज्य वन सेवा संवर्ग के अधिकारी की पदस्थापना पर सवाल उठाए हैं। संगठन ने छत्तीसगढ़ वन (राजपत्रित) सेवा भर्ती नियम, 2015 का उल्लेख करते हुए कहा है कि इन नियमों में भर्ती एवं पदस्थापना के प्रावधान निर्धारित हैं।छत्तीसगढ़ फॉरेस्ट रेंजर एसोसिएशन ने वन मंत्री और अपर मुख्य सचिव से मामले में हस्तक्षेप करने तथा संबंधित पदस्थापना पर पुनर्विचार करने की मांग की है। अब इस मामले में शासन की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, इस पर वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की नजर रहेगी।





