
डेस्क खबर खुलेआम
गणेश भोय जिला ब्यूरो जशपुर
भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर कार्रवाई की मांग तेज, अधीक्षक के निलंबन और FIR की उठी मांग; ग्रामीणों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
पत्थलगांव/तमता। जशपुर जिले के पत्थलगांव विकासखंड अंतर्गत तमता बालक छात्रावास में पदस्थ अधीक्षक बुधनाथ भगत के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं, फर्जी नियुक्तियों और छात्रावास के बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इन आरोपों पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से स्थानीय नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है। लोगों ने आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है।कार्रवाई में देरी क्यों? अधिकारियों की भूमिका पर सवालस्थानीय नागरिकों और क्षेत्र के प्रबुद्धजनों का कहना है कि छात्रावास अधीक्षक के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आने के बावजूद विभागीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जांच की स्थिति क्या है और अब तक जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या कदम उठाए हैं। लोगों ने सहायक आयुक्त से पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट करने तथा निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की है।ग्रामीणों का सवाल है कि यदि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं, तो उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? वहीं, मामले में अधिकारियों की चुप्पी को लेकर भी असंतोष जताया जा रहा है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि निष्पक्ष जांच और आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर ही हो सकेगी।बच्चों के हक से जुड़े आरोपों ने बढ़ाई चिंताछात्रावास में बच्चों को उपलब्ध कराए जाने वाले कंबल, मच्छरदानी, थाली और अन्य आवश्यक सामग्रियों के वितरण एवं उपयोग में कथित अनियमितताओं को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि छात्रावास में रहने वाले बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी गंभीर विषय है। इसलिए संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए।इसके अलावा, फर्जी नियुक्तियों और वित्तीय लेन-देन में कथित गड़बड़ियों के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि जांच केवल कागजी औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि दस्तावेजों, भुगतान विवरण और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल होनी चाहिए।निलंबन और FIR की मांग, आंदोलन की चेतावनीमामले को लेकर तमता क्षेत्र में नाराजगी बढ़ने के बीच स्थानीय नागरिकों और विभिन्न संगठनों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मामले में ठोस पहल नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे। उनकी मांग है कि छात्रावास के बच्चों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए और पूरे प्रकरण में पारदर्शिता बरती जाए।अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी निगाहेंतमता छात्रावास से जुड़े आरोपों ने विभागीय निगरानी और जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और आदिम जाति कल्याण विभाग मामले की जांच को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं और शिकायतों पर क्या कार्रवाई करते हैं। क्षेत्र के लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन समयबद्ध जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगा तथा दोष सिद्ध होने पर जिम्मेदारों के खिलाफ उचित कदम उठाएगा।







