
खबर खुलेआम
धरमजयगढ़ से राजू यादव कि खास रिपोर्ट
शिकायत कर्ता ने लगाया टैक्स इनवॉइस में तिथि व जीएसटी विवरण नहीं होने का आरोप, फर्म के अस्तित्व पर सवाल; प्रशासनिक जांच के दायरे में पूरा मामला
धरमजयगढ़। जनपद पंचायत धरमजयगढ़ की ग्राम पंचायत पारेमेर में 15वें वित्त आयोग की राशि से किए गए भुगतानों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। लोक शिकायत निवारण पोर्टल के माध्यम से की गई शिकायत के बाद मामला कलेक्टर कार्यालय रायगढ़ पहुंच चुका है, जहां संबंधित अभिलेखों की प्रशासनिक जांच प्रारंभ कर दी गई है। शिकायत में पंचायत द्वारा किए गए भुगतानों की पारदर्शिता, लेखा प्रक्रिया और वित्तीय नियमों के पालन पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।शिकायतकर्ता का आरोप है कि पंचायत ने ‘निधि ट्रेडर्स’ नामक जीएसटी पंजीकृत फर्म को लाखों रुपये का भुगतान किया, जबकि फर्म के पंजीकृत पते के भौतिक सत्यापन के दौरान वहां न दुकान मिली, न गोदाम और न ही किसी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि संचालित होती दिखाई दी। शिकायतकर्ता का दावा है कि आसपास के ग्रामीणों और व्यापारियों से पूछताछ में भी ऐसी किसी सक्रिय फर्म की जानकारी सामने नहीं आई। शिकायत में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, बिल क्रमांक 72 में क्रेशर गिट्टी के लिए ₹50,000 तथा मिक्सर मशीन किराये के लिए ₹21,700 सहित कुल ₹71,700 का भुगतान दर्शाया गया है। बिल पर “TAX INVOICE” अंकित होने के बावजूद उसमें CGST और SGST का विवरण रिक्त बताया गया है। साथ ही, बिल पर तिथि अंकित नहीं होने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि ऐसे टैक्स इनवॉइस की वैधता और कर नियमों के अनुपालन की तकनीकी जांच आवश्यक है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। मामले में पंचायत सचिव ने फोन पर पत्रकारों से चर्चा के दौरान संबंधित फर्म के संचालित होने का दावा किया और कहा कि फर्म अस्तित्व में है। दूसरी ओर शिकायतकर्ता का कहना है कि पंजीकृत पते पर किसी प्रकार का व्यवसायिक प्रतिष्ठान नहीं मिला। इसी विरोधाभास ने पूरे मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया है। फिलहाल दोनों पक्षों के दावों की सत्यता प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित वेंडर के बिल केवल ग्राम पंचायत पारेमेर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अन्य पंचायतों में भी भुगतान के लिए उपयोग किए गए हैं। शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण में संभावित मिलीभगत की निष्पक्ष जांच और सभी संबंधित भुगतानों की समीक्षा की मांग की है। शिकायतकर्ता ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC), राज्य कर विभाग और जिला प्रशासन से फर्म के पंजीकृत पते का भौतिक सत्यापन, जीएसटी दस्तावेजों की तकनीकी जांच तथा ग्राम पंचायत पारेमेर द्वारा 15वें वित्त आयोग मद से किए गए सभी भुगतानों का स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट कराने की मांग की है। साथ ही, यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और वेंडर के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की मांग भी की गई है।फिलहाल पूरा मामला प्रशासनिक जांच के अधीन है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि या खंडन जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा। जांच के निष्कर्ष और सक्षम प्राधिकारी की कार्रवाई पर अब सभी की नजरें टिकी हैं।












