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वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल: क्या ईश्वरदास मानिकपुरी को मिला है ‘खास संरक्षण’?

By Khabar Khule Aam Desk

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डेस्क खबर खुलेआम

जीपीएम दीपक गुप्ता कि खास रिपोर्ट

पसान/कटघोरा। कटघोरा वनमंडल के वनपरिक्षेत्र पसान में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने विभागीय कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार ईश्वरदास मानिकपुरी के पास वर्तमान में पसान सर्किल के डिप्टी रेंजर, पसान एवं अड़सरा बीट का प्रभार, और पसान नर्सरी रोपड़ी का चार्ज भी है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एक ही कर्मचारी को इतने महत्वपूर्ण प्रभार किस आधार पर सौंपे गए हैं? इतना ही नहीं, स्थानीय सूत्रों का दावा है कि ईश्वरदास मानिकपुरी वर्षों से लगातार पसान क्षेत्र में ही पदस्थ हैं। पहले बीट गार्ड के रूप में, फिर पदोन्नति के बाद डिप्टी रेंजर के रूप में भी उनकी तैनाती उसी क्षेत्र में बनी हुई है। अब उनके पास अतिरिक्त प्रभार भी हैं।क्या नियमों को दरकिनार कर बनाया गया ‘स्थायी साम्राज्य’?वन विभाग में सामान्यतः पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए समय-समय पर अधिकारियों और कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जाता है, ताकि किसी एक क्षेत्र में लंबे समय तक जमे रहने से हितों के टकराव की स्थिति न बने। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि सूत्रों का दावा सही है, तो पदोन्नति के बाद भी वर्षों तक एक ही क्षेत्र में निरंतर पदस्थापना किस नियम के तहत हुई?तीन-तीन प्रभार, जवाबदेही किसकी?जब एक ही अधिकारी के पास सर्किल, बीट और नर्सरी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हों, तब निगरानी और जवाबदेही पर भी प्रश्न खड़े होते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी शक्तियां एक ही व्यक्ति के पास केंद्रित होने से विभागीय पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है। इसी कारण क्षेत्र में अवैध गतिविधियों को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।उच्चस्तरीय जांच की मांगस्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कर यह स्पष्ट किया जाए—* ईश्वरदास मानिकपुरी कितने वर्षों से पसान क्षेत्र में पदस्थ हैं?* पदोन्नति के बाद भी उन्हें उसी क्षेत्र में रखने का आदेश किस आधार पर जारी हुआ?* उनके पास वर्तमान में कौन-कौन से अतिरिक्त प्रभार हैं और किस आदेश के तहत दिए गए?* क्या यह व्यवस्था विभागीय नियमों और स्थानांतरण नीति के अनुरूप है?यदि सब कुछ नियमों के तहत हुआ है तो वन विभाग को इसकी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। यदि नहीं, तो जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।(नोट: उपरोक्त जानकारी स्थानीय सूत्रों एवं उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित है। संबंधित अधिकारी एवं वन विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

Khabar Khule Aam Desk

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