
खबर खुलेआम
रायगढ़ / पेलमा कोल माइंस परियोजना को लेकर प्रभावित गांवों में असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। ग्राम जरीडीह समेत पेलमा, उरबा, हिझर, लालपुर मडवाडूमर, सक्ता और मिलुपारा के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए 19 मई 2026 को प्रस्तावित जनसुनवाई को स्थगित करने की मांग उठाई है।ग्रामीणों का कहना है कि जब तक मुआवजा, पुनर्वास नीति और रोजगार से जुड़ी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक जनसुनवाई कराना न्यायोचित नहीं होगा। उनका आरोप है कि एक ही परियोजना के लिए अलग-अलग गांवों में सर्किल रेट में भारी अंतर रखा गया है, जिससे प्रभावित परिवारों के बीच असमानता पैदा हो रही है।



ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि जब परियोजना एक है, तो मुआवजा भी समान दर पर मिलना चाहिए। खासकर दो फसली और उपजाऊ जमीन के लिए अलग-अलग दरें तय किए जाने को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि अधिकांश ग्रामीणों की आजीविका खेती पर निर्भर है, ऐसे में केवल नकद मुआवजा पर्याप्त नहीं है। उन्होंने भूमि के बदले वैकल्पिक भूमि देने और प्रत्येक प्रभावित परिवार से कम से कम एक सदस्य को रोजगार देने की मांग प्रमुखता से रखी है।ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व में कई बार प्रशासन को लिखित रूप से अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे असंतोष और अविश्वास लगातार बढ़ रहा है। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया और जनसुनवाई को स्थगित नहीं किया गया, तो ग्रामीण आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी परिस्थिति की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।फिलहाल प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस बढ़ते असंतोष को किस तरह संभालता है और क्या ग्रामीणों की मांगों पर कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं।













