

खबर खुलेआम
रायगढ़ जिले का घरघोड़ा आज विकास नहीं, बल्कि राख तंत्र का शिकार बन चुका है। सड़कों पर उड़ती फ्लाइ ऐश अब सिर्फ गंदगी नहीं रही यह सीधे लोगों की सांसों में घुलता जहर बन चुकी है। और हैरानी की बात? सब कुछ खुल्लम-खुल्ला हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग चुप्पी साधे बैठे हैं। घरघोड़ा और क्षेत्र इन दिनों राख पाटने वालों के लिए स्वर्ग बना हुआ है। स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण विभाग ने आंखों में पट्टी बांध ली है।
बता दे की क्षेत्र में सरडा एनर्जी , महाबीर एनर्जी टीआरएन एनर्जी एवं अन्य उद्योग से निकलने वाले फ्लाई एस से चारों तरफ से राख के आगोश में समा रहा है पुरे घरघोड़ा क्षेत्र कि हालात बद से बदतर हैं। रेलवे ट्रैक के किनारे खेत हों या मुख्य सड़क हर जगह राख की मोटी परत बिछी हुई है। भारी वाहनों के गुजरते ही यह जहरीली धूल हवा में फैलती है, जिससे सड़कें फिसलन भरी और जानलेवा बन गई हैं। क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है ? फ्लाइ एस से अगर किसी कि जान जाती है जाए इससे एसी के बंद कमरों में बैठने वाले अधिकारियों की कोई फर्क नहीं है।

घरघोड़ा बायपास 👇🏼👇🏼


कटंगडीह 👇🏼

स्थानीय लोगों का आरोप साफ है कि उद्योग प्रबंधन नियमों को ठेंगा दिखा रहा है। समतलीकरण के नाम पर खुलेआम फ्लाइ ऐश फेंकी जा रही है, जबकि इसके सुरक्षित निपटान के सख्त नियम मौजूद हैं। सवाल उठता है कि क्या ये नियम सिर्फ दिखावे के लिए हैं? लेकिन असली सवाल स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण विभाग पर है। शिकायतें हुईं, आवाजें उठीं फिर भी कोई कार्रवाई नहीं। स्थानीय प्रशासन और जिला पर्यावरण विभाग कि यह चुप्पी सिर्फ लापरवाही है या फिर किसी दबाव का नतीजा ? या ये कहे कि चंद टुकड़ो के लिए बेबस हो गए है ? इस पूरे खेल में आम जनता पिस रही है हवा में घुलती राख अब बीमारी बनकर लौट रही है सांस की दिक्कत, आंखों में जलन और लगातार बिगड़ती सेहत। यह सिर्फ प्रदूषण नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ स्वास्थ्य आपातकाल है।
अब लोग पूछ रहे हैं कब जागेगा प्रशासन ? कौन रोकेगा यह जहरीला खेल? और आखिर कब तक घरघोड़ा के लोग “राख” में जीने को मजबूर रहेंगे? अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सिर्फ पर्यावरण नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी का काला सच बन जाएगा।














