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संलग्नकर्ता राजू यादव धर्मजयगढ़
धरमजयगढ के पुरे में क्षेत्र शासकीय राशन न मिलने गरीब मजदूर अन्य सभी हितग्राहियों में हाहाकार मचा हुआ है। ग्रामीण जन लगातार शिकायत लेकर स्थानीय प्रशासन से जिम्मेदार लोगों तक पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में आज ग्राम पंचायत सकालो में राशन वितरण में हो रही अनियमितताओं से ग्रामीणों में गहरी नाराजगी है। खासकर गरीब और जरूरतमंद हितग्राही महीनों से राशन न मिलने से परेशान हैं। इसी को लेकर सोमवार को भारी संख्या में ग्रामीण महिलाएं एसडीएम कार्यालय पहुंचीं और अपनी शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि चार से पांच महीने से उन्हें चावल नहीं मिला है, जबकि चना और शक्कर की आपूर्ति भी कई महीनों से बंद है।

हितग्राहियों की पीड़ा
ग्राम पंचायत सकालो की हितग्राही सलेन टोप्पो ने बताया कि गांव में बहुत से लोगों को चार से पांच महीने से राशन नहीं मिला है। चावल, चना और शक्कर के अभाव में लोगों को आर्थिक रूप से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला।
अधिकारियों तक पहुंची शिकायत
और वहीं आज विवश होकर हितग्राहियों ने पहले जनपद पंचायत सीईओ से इस संबंध में शिकायत की है, और जब वहां से भी कोई ठोस कार्रवाई होगी, साथ ही उन्होंने एसडीएम और खाद्य अधिकारी तक अपनी बात पहुंचाने आवेदन लेकर बड़ी संख्या में महिलाएं धरमजयगढ़ एसडीएम कार्यालय पहुंचीं, लेकिन एसडीएम टीएल मीटिंग में व्यस्त थे। इस वजह से महिलाएं जनपद पंचायत कार्यालय के पास एसडीएम का इंतजार करने को मजबूर रहीं।
राशन व्यवस्था में सुधार की मांग
ग्रामीण महिलाओं ने प्रशासन से मांग की है कि राशन वितरण में हो रही अनियमितताओं की जांच कर जल्द से जल्द सभी लाभार्थियों को राशन उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।
अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जाएगी और यदि किसी भी तरह की गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों और राशन डीलरों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया है कि उनकी शिकायतों का जल्द समाधान किया जाएगा। गौरतलब है कि राशन वितरण को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें सामने आई हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण ग्रामीणों की परेशानी लगातार बनी हुई है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस बार कितनी गंभीरता से इस मामले को लेता है और कब तक हितग्राहियों को उनका हक मिल पाता है।

