
खबर खुलेआम
धरमजयगढ़ / विकासखंड धरमजयगढ़ के दुरांचल ग्राम पंचायत कूमा का अमृत सरोवर आज ग्रामीण जीवन के लिए संजीवनी साबित हो रहा है। महात्मा गांधी नरेगा के तहत निर्मित यह जलाशय मात्र 1.40 एकड़ भूमि पर फैला हुआ है, जिसमें 11,900 क्यूबिक मीटर पानी संग्रहित है। यही जलस्रोत अब 13.82 एकड़ खेतों की प्यास बुझाकर सूखी धरती को हरी-भरी बना रहा है
जनसम्पर्क विभाग द्वारा वीडियो अपलोड किया 👇🏼👇🏼
कभी वर्षा पर निर्भर रहने वाले किसान अब चौमासे में भी खेतों को लहलहाता देख रहे हैं। खेतों में सोने जैसी फसलें लहलहा रही हैं और किसानों की आँखों में नई उम्मीदों का उजाला उतर आया है।जन सम्पर्क विभाग ने इस अमृत सरोवर के फोटो और वीडियो अपने फेसबुक पेज पर साझा किए, जिन्हें लोग बड़ी संख्या में देख और साझा कर रहे हैं। देखते ही देखते यह छोटा-सा गाँव पूरे इलाके में चर्चा का केंद्र बन गया है।यह सरोवर केवल जल संरक्षण का प्रतीक नहीं बल्कि अजीविका संवर्धन का सशक्त माध्यम बन चुका है। धरमजयगढ़ की मिट्टी अब सिर्फ मिट्टी नहीं, बल्कि किसानों की मुस्कान और समृद्ध भविष्य की धरोहर बन गई है।इस सफलता के पीछे कई हाथों का अथक परिश्रम और समर्पण रहा है।
जनपद पंचायत धरमजयगढ़ के सीईओ मदनलाल साहू, तकनीकी सहायक यादवमणी कमलवंशी, रोजगार सहायक चक्रधर राठिया, सचिव नंदलाल भगत और पूर्व सरपंच राजेंद्र प्रसाद राठिया ने अपने संघर्ष और प्रयासों से कूमा पंचायत के अमृत सरोवर को जिले ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में प्रथम श्रेणी की पहचान दिलाई है। आज इनके कार्य को प्रदेशभर में सराहा जा रहा है
(संकलनकर्ता – राजू यादव, धरमजयगढ़)
