

डेस्क खबर खुलेआम



राजू यादव कि खास रिपोर्ट
धरमजयगढ़ / रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र के भालूपखना स्थित धनबादा पावर कंपनी द्वारा संचालित 7.5 मेगावाट बिजली उत्पादन परियोजना में गंभीर अनियमितताओं और अवैध रेत उत्खनन का मामला सामने आया है। परियोजना से जुड़े ठेकेदारों पर आरोप है, कि वे प्रशासन की अनदेखी के चलते धड़ल्ले से अवैध खनन को अंजाम दे रहे हैं,जिससे क्षेत्र की नदियों और पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है। अवैध रेत उत्खनन का अड्डा बनी परियोजनास्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, परियोजना के नाम पर लगातार रेत का अवैध खनन और परिवहन किया जा रहा है। दिन-रात डंपरों की आवाजाही से सड़कें जर्जर हो गई हैं,वहीं रेत माफिया बेखौफ होकर प्रशासन की नाक के नीचे अपने कारनामों को अंजाम दे रहे हैं। बताया जा रहा है,कि यह सारा काम धनबादा पावर प्रोजेक्ट में कार्यरत ठेकेदारों की मिलीभगत से किया जा रहा है

जो नियमों को ताक पर रखकर अवैध रेत का दोहन कर रहे हैं। परियोजना में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपसूत्रों की मानें तो धनबादा बिजली परियोजना में कई स्तरों पर भ्रष्टाचार हो रहा है। सरकारी नियमों के उल्लंघन के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। बिजली उत्पादन के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है और परियोजना में गुणवत्ता की अनदेखी की जा रही है।

जिम्मेदार कि चुप्पी पर उठ रहे सवाल
वहीं अवैध रेत उत्खनन और परियोजना में भ्रष्टाचार के इन मामलों पर स्थानीय प्रशासन और जिम्मेदार विभाग की चुप्पी से स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश है

क्षेत्र के स्थानीय निवासी रामकुमार यादव ने पुरे मामले में जिम्मेदार अधिकारीयों और कंपनी के बीच मिलीभगत का आरोप लगाते हुए पूरे मामले कि उच्चस्तरीय जांच कराई कराने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने कि मांग कि जा रही है।

बता दें, मामले में पर्यावरणविदों और स्थानीय संगठनों ने सरकार से अवैध रेत उत्खनन व परियोजना में हो रहे भ्रष्टाचार की जांच कराने की मांग बहुत जल्द करेंगे। यदि जल्द ही इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो धरमजयगढ़ क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों को भारी नुकसान पहुंच सकता है।

