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उधारी को लेकर कि गई हत्या .. आरोपी को आजीवन कारावास की सजा

By Khabar Khule Aam Desk

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खबर खुलेआम

निरंजन गुप्ता / प्रदीप धोबा पूंजीपथरा

तत्कालीन सहायक उप निरीक्षक जयराम सिदार कि विवेचक से मिला पीड़ित परिवार को न्याय

रायगढ़, 29 मार्च चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश विरेंद्र के न्यायालय ने 24 मार्च को हत्या के मामले में आरोपी सूरज राठिया पिता बंधन राठिया उम्र 22 वर्ष निवासी ग्राम आमगांव थाना धरमजयगढ़ को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है। आरोपी ने थाना पूंजीपथरा क्षेत्र अंतर्गत विंध्याचल ऑक्सीजन प्लांट की लेबर कॉलोनी में पिकअप चालक विरेन्द्र खम्हारी (30 साल) निवासी ग्राम लुकापारा सरिया की टांगी मारकर हत्या कर दी थी। घटना 22 अगस्त की रात की है। मृतक विरेन्द्र खम्हारी निवासी लुकापारा सरिया प्लांट में पिकअप चालक था और आरोपी सूरज राठिया खलासी का काम करता था। दोनों लेबर कॉलोनी में अलग-अलग क्वार्टर में रहते थे और आपस में अच्छे संबंध थे। घटना के दिन विरेन्द्र द्वारा सूरज से उधार पैसे मांगे जाने पर दोनों के बीच विवाद हुआ। विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपी सूरज राठिया ने टांगी से हमला कर विरेन्द्र को गंभीर रूप से घायल कर दिया। मेडिकल कॉलेज ले जाते समय विरेन्द्र की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही तत्कालीन थाना प्रभारी पूंजीपथरा निरीक्षक राकेश मिश्रा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और वरिष्ठ अधिकारियों को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए फरार आरोपी की तलाश शुरू की। फरार आरोपी सूरज राठिया अपने क्वार्टर में सामान लेने वापस आया था, तभी पुलिस ने घेराबंदी कर उसे हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि पैसों के विवाद में उसने हमला किया था। इस प्रकरण की प्रारंभिक विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी पूंजीपथरा निरीक्षक राकेश मिश्रा द्वारा की गई, जिसके बाद विवेचना सहायक उप निरीक्षक जयराम सिदार द्वारा आगे बढ़ाई गई। विवेचना अधिकारी जयराम सिदार ने वैज्ञानिक साक्ष्य, घटनास्थल से जुटाए गए प्रमाण, एफएसएल रिपोर्ट और महत्वपूर्ण गवाहों के बयान को मजबूत तरीके से न्यायालय में प्रस्तुत कराया। अभियोजन पक्ष के साथ समन्वय कर सभी महत्वपूर्ण साक्षियों के कथन कराए गए और गवाहों के बयान अडिग रहे, जिससे आरोपी को कठोर सजा दिलाने में सफलता मिली। मामले में अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक सुश्री वंदना केशरवानी ने प्रभावी पैरवी की। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मजबूत विवेचना और सटीक अभियोजन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बना, जिसमें विवेचना अधिकारी सहायक उप निरीक्षक जयराम सिदार की सराहनीय भूमिका से मृतक के परिजनों को न्याय मिला।

एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह का स्पष्ट संदेश है – पुलिस की विवेचना आरोपियों को उनके कृत्य के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा दिलाने पर केंद्रित होनी चाहिए। मजबूत विवेचना ही न्याय की सबसे बड़ी आधारशिला है।”*

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Khabar Khule Aam Desk

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