
डेस्क खबर खुलेआम
बऋषि पंचमी पर ग्राम देवरी में आस्था और लोकपरंपरा का अनूठा संगम, पूजा के बाद जंगल में छोड़े गए सर्प
गरियाबंद। ऋषि पंचमी के अवसर पर गरियाबंद जिले के ग्राम देवरी में सोमवार को आस्था, परंपरा और लोकसंस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए सांवरा समाज के लोगों ने जहरीले सर्पों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच पूरे गांव में सर्पों की शोभायात्रा निकाली गई। इस अनोखे आयोजन को देखने के लिए आसपास के गांवों सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।पीढ़ियों से चली आ रही सर्प पूजा की परंपराग्राम देवरी में ऋषि पंचमी पर सर्प पूजा की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। पूजा-अर्चना के बाद प्रशिक्षित सपेरे विभिन्न प्रजातियों के सर्पों को लेकर गांव में शोभायात्रा निकालते हैं। इस दौरान नाग सांप के अलावा करैत, अशोडीयां, गोहा और फुरसे जैसे जहरीले सर्प भी प्रदर्शित किए जाते हैं। ढोल-नगाड़ों की थाप और पारंपरिक वेशभूषा के बीच श्रद्धालु उत्साहपूर्वक आयोजन में शामिल होते हैं। सर्पों को करीब से देखने के लिए ग्रामीणों और बच्चों में विशेष उत्सुकता देखने को मिली।
सर्पदंश से बचाव का दिया जाता है प्रशिक्षण
ग्राम देवरी के गुरु सांवरा पाठशाला में वर्षभर ग्रामीणों को सर्पदंश से बचाव और उपचार से संबंधित जानकारी दी जाती है। ऋषि पंचमी के अवसर पर इसी प्रशिक्षण का दीक्षांत समारोह भी आयोजित किया जाता है, जिसमें प्रशिक्षित लोगों को सम्मानित कर जागरूकता का संदेश दिया जाता है। आयोजन धार्मिक परंपरा के साथ-साथ सर्पदंश से बचाव और जनजागरूकता का माध्यम भी बनता है।पूजा के बाद सर्पों को जंगल में छोड़ाआयोजन के समापन पर परंपरा के अनुसार पूजा में शामिल सभी सर्पों को सुरक्षित रूप से उनके प्राकृतिक आवास जंगल में वापस छोड़ दिया जाता है। आयोजकों की ओर से सर्पों की निगरानी और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखे जाने की बात कही जाती है। ग्रामीणों के अनुसार, हर वर्ष इस आयोजन में हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। ग्राम देवरी की यह अनूठी परंपरा आज भी गुरु परंपरा, लोकआस्था और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक बनी हुई है।



