
खबर खुलेआम
रायगढ़। करीब छह वर्ष पुराने चर्चित हत्या और हत्या के प्रयास के मामले में न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा ने आरोपी शिव चरण पटेल, खुशी राम पटेल और मुकेश पटेल को हत्या के अपराध में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास तथा हत्या के प्रयास के मामले में 10-10 वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया है।अभियोजन के अनुसार, थाना तमनार के अपराध क्रमांक 415/2020 के तहत 2 दिसंबर 2020 की सुबह ग्राम दनौट निवासी मुरलीधर चौधरी और लक्ष्मीधर चौधरी अपनी मां को मायके से प्राप्त बंटवारे की जमीन का सीमांकन कराने पटवारी के साथ ग्राम रायपारा पहुंचे थे। इस दौरान ग्राम कोटवार, गोविन्द पटेल तथा अन्य ग्रामीण भी मौके पर मौजूद थे और खेत की नाप-जोख की जा रही थी।इसी बीच आरोपी शिव चरण पटेल, खुशी राम पटेल और मुकेश पटेल लाठी-डंडों से लैस होकर वहां पहुंचे और जमीन नपवाने को लेकर विवाद करने लगे। आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी और गोविन्द पटेल, मुरलीधर चौधरी तथा लक्ष्मीधर चौधरी पर हमला कर दिया। हमले में तीनों गंभीर रूप से घायल होकर बेहोश हो गए।घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तमनार ले जाया गया, जहां से उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल रायगढ़ रेफर किया गया। लेकिन रास्ते में ही गोविन्द पटेल ने दम तोड़ दिया, जबकि दोनों घायल भाइयों का इलाज रायगढ़ में कराया गया।घटना की रिपोर्ट करन पटेल द्वारा थाना तमनार में दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने तत्काल अपराध पंजीबद्ध कर विस्तृत विवेचना की और पर्याप्त साक्ष्य जुटाकर आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया।सुनवाई के दौरान न्यायालय ने महत्वपूर्ण गवाहों के बयान, चिकित्सकीय साक्ष्य और अन्य दस्तावेजी प्रमाणों का परीक्षण किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने तीनों आरोपियों को गोविन्द पटेल की हत्या तथा मुरलीधर चौधरी और लक्ष्मीधर चौधरी की हत्या के प्रयास का दोषी पाया।न्यायालय ने आरोपियों को हत्या के मामले में आजीवन कारावास, हत्या के प्रयास के मामले में 10-10 वर्ष के कठोर कारावास तथा उपहति कारित करने के अपराध में एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही विभिन्न धाराओं के तहत एक-एक हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया गया। इसके अलावा न्यायालय ने मृतक गोविन्द पटेल के आश्रितों को एक लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दिलाने हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायगढ़ को अनुशंसा भी की है। मामले में राज्य की ओर से अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने प्रभावी पैरवी की।












